मुम्मी की रोटी गोल गोल
पापा का पैसा गोल गोल
दादा का चश्मा गोल गोल
दादी की बिंदी गोल गोल
तू और मैं गोल मटोल
मुम्मी की रोटी
February 1, 2007 at 3:28 pm (Hindi, Kids, Rhyme)
February 1, 2007 at 3:28 pm (Hindi, Kids, Rhyme)
मुम्मी की रोटी गोल गोल
पापा का पैसा गोल गोल
दादा का चश्मा गोल गोल
दादी की बिंदी गोल गोल
तू और मैं गोल मटोल
NS said,
March 5, 2007 at 10:30 am
बहूत सुंदर, बच्चों के लिए बहूत ही माधूर और मा का प्यार लिए हुएI
neraj said,
May 8, 2009 at 12:50 pm
bhai sahaab mast poem hai
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष said,
August 28, 2009 at 8:01 am
वाह !!! अच्छा और अलग है !!!
आखरी लाईनें मैनें कुछ ऐसी सुनी हैं :
हम भी गोल, तुम भी गोल,
सारी दुनिया गोल मटोल !!!
AMAR MANGTANI said,
October 2, 2009 at 9:39 am
August 28, 2009 at 8:01 am
वाह !!! अच्छा और अलग है !!!
आखरी लाईनें मैनें कुछ ऐसी सुनी हैं :
हम भी गोल, तुम भी गोल,
सारी दुनिया गोल मटोल