मुम्मी की रोटी

मुम्मी की रोटी गोल गोल
पापा का पैसा गोल गोल
दादा का चश्मा गोल गोल
दादी की बिंदी गोल गोल
तू और मैं गोल मटोल

4 Comments

  1. NS said,

    March 5, 2007 at 10:30 am

    बहूत सुंदर, बच्चों के लिए बहूत ही माधूर और मा का प्यार लिए हुएI

  2. neraj said,

    May 8, 2009 at 12:50 pm

    bhai sahaab mast poem hai

  3. August 28, 2009 at 8:01 am

    वाह !!! अच्छा और अलग है !!!

    आखरी लाईनें मैनें कुछ ऐसी सुनी हैं :

    हम भी गोल, तुम भी गोल,
    सारी दुनिया गोल मटोल !!!

  4. AMAR MANGTANI said,

    October 2, 2009 at 9:39 am

    August 28, 2009 at 8:01 am

    वाह !!! अच्छा और अलग है !!!

    आखरी लाईनें मैनें कुछ ऐसी सुनी हैं :

    हम भी गोल, तुम भी गोल,
    सारी दुनिया गोल मटोल


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